पत्रकार सच्चाई के संरक्षक होते है।पत्रकारिता कर्मठता का कार्य है। पत्रकार समाज को सही दिशा देने का काम करत है।आप जब भी अपने ऐतिहासिक घटनाओं को याद करेंगे तो उसमें पत्रकारिता का बड़ा योगदान मिलता है इसलिए पत्रकार आरम्भिक स्तर पर इतिहासकार भी होते हैं। आज पत्रकारिता के समक्ष यह चुनौती है कि वह व्यावसायिकता के कुचक्र से अपने अंतर्वस्तु को कैसे बचाएं? सच की ताकत पत्रकारिता की आत्मा हैं। इस सच को दिखाना -बताना एक चुनौती है। पत्रकारिता में पत्रकारों के लिए धैर्य का अपना विशेष महत्व है।अत: एक सम्पादक को जुनूनी होना चाहिए। विशेषकर संस्थापक सम्पादक को। आज के दौर में अखबार निकालना भगीरथ बनना है। समाचारों की गंगा बह पाएगी क्या?सत्यम, शिवम,सुंदरम हो पाएगा क्या? सवाल खडा़ है लुकाटी लिए। पर कोई भी पत्रकार अब सच के लिए अपना घर फूकने के लिए तैयार नहीं। कितना बदल गया पत्रकार। पर बदला क्यों? आओं पता लगाएं।
आपका :
प्रभाशंकर
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